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Archive for the 'Dharm aur Darshan' Category

OM The Sacred Syllable

II “OM” II

II The Sacred Syllable II

“ॐ” “OM” is the most sacred syllable in Hinduism.”OM” is a Sanskrit word, which is said to be the original primordial creative sound from which the universe and all of
creation first manifested. It is the root syllable (mula mantra मूल मन्त्र), the cosmic vibration that hold together the atoms of the world and heavens. While pronounced “OM”, certain Sanskrit scholars state that it is written as “AUM”.

Gita Saransh

महामृत्युन्जय मन्त्र

ॐ श्री परमात्मने नमः

ॐ नमः शिवाय

श्री महामृत्युन्जय मन्त्र

ॐ त्रयंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

=== भावार्थ===

हम तीन नेत्रों वाले भगवान शंकर की पूजा करते है । जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते है । जो सम्पूर्ण जगत का पालन पोषण अपनी शक्ति से कर रहे है । उनसे हमारी प्रार्थना है कि वे हमें जन्म मृत्यु के बन्धनों से मुक्त कर, मोक्ष की प्राप्ति करावे । हे प्रभू जिस प्रकार ककडी उसकी बेल में पक जाने के बाद उस बेल से बिना किसी प्रयत्न के अलग हो जाती है, उसी प्रकार हम भी इस संसार रुपी बेल में पक जाने के बाद जन्म मृत्यु के बन्धनों से सदैव के लिये मुक्त हो जाये और आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुये शरीर को त्याग कर आप में लीन हो जावें ।

मंत्र ज्ञान

मंत्र एक गूढ ज्ञान है। सद्गुरु की कृपा और मन को एकाग्र करके ही इसे जाना जाता है। तंत्रागम के अनुसार दैवी शक्तियों का गूढ रहस्य मंत्र में अंतर्निहित है। मनुष्य की विलुप्त या प्रसुप्त शक्ति को जगाकर उसका दैवी शक्ति से सामंजस्य कराने वाला गूढ ज्ञान मंत्र कहलाता है। यह गूढ विद्या है जो साधकों को दुःखों से मुक्त करके उनकी मनोकामनाओं को पूरा करती है। और परम आनन्द प्रदान करती है। मंत्र विद्या विश्व के सभी देशों, धर्मों और सम्प्रदायों में हजारों लाखों वर्षों से आस्था व विश्वास के साथ प्रचलित है।

मंत्रों के प्रकार

चौपाई मंत्र


श्री रामचरितमानस की अनेक चौपाइयां मंत्र के समान है। इन चौपाइयों का विधि विधानपूर्वक जप करने से साधक की मनोकामनायें पूरी होती है और कष्टों का निवारण होता है। मंत्र जप एकान्त में बैठकर करें। मंत्र सिद्ध करने के लिये जप से साथ हवन करे। जिन साधकों के मन में श्री राम के प्रति अगाध श्रद्धा होगी, उन्हें ही मंत्रों की सिद्धि होगी।