सुनहरी चिड़िया और सुनहरे हंस
एक समय की बात है । एक राजा था । झीलों की नगरी में उसका भव्य राजमहल स्थित था। उन झीलों में से एक उसके राजमहल के चारों ओर फैली थी, साथ ही वहां एक बेहद सुंदर बाग भी था। उस झील में बहुत से सुनहरे हंस विचरा करते थे। ये सभी हंस रोजाना सोने का एक पंख गिराया करते थे। राजा उन सभी पंखों को एकत्र करवाता और राजकोष में जमा करवा देता।